"सजा मुझे मिली क्यों"
I dedicate this poem to all girls and specially rape victims and acid attack victims. These girls are the inspiration for us 😊🙏
जब गलती मेरी नहीं थी तो
फिर मुझे सजा मिली क्यों?
जब गुनाह किसी और का था तो
फिर सजा मुझे मिली क्यों?
यह समाज अगर सिर्फ लड़कों के लिए तो
फिर लड़कियों को पैदा करते ही क्यों?
इज्जत की बात सिर्फ एक लड़की के लिए ही हो तो
फिर ऐसे समाज की जरूरत ही क्यों?
जब नहीं दे सकते लड़के और लड़की को बराबरी तो
फिर ये दिखावे की जरूरत क्यों?
हवस उठे अगर लड़कों के अंदर तो
फिर नारी की इज्जत लुटे क्यों?
गलती की लड़के ने फिर
सजा और बदनामी मिले मुझे क्यों?
लड़का हो तो सब गलती माफ और
लड़की हो तो बंदिशें ऐसा दोगलापन क्यों?
लड़का करें कई शादियां तो भी माफ और
लड़की करे किसी से बात तो कुलक्षिणी ऐसा क्यों?
अगर नहीं है किसी से प्यार तो
उसे मना करने का हक मुझे नहीं क्यों?
अगर मैं उसे ना मिली तो मेरे चेहरे पर
तेजाब डालकर उसे खराब करने का हक उसे क्यों?
उसने मुझे कहां कहां छुआ मेरे साथ कैसा सलूक किया
यह सब बताने का हक मुझे नहीं क्यों?
अगर मैंने आवाज उठा कर बताना चाहा तो
बंद करो यह बेशर्मी का प्रदर्शन,ऐसा क्यों?
उसने मेरी पूरी इज्जत का प्रदर्शन किया
वो कुछ भी नहीं,ऐसा क्यों?
अगर मैंने किया मना तो
मुझे बदनाम करने का हक उसे क्यों?
ये धमकियां ये इज्जत ये बदनामी का
डर सिर्फ मुझे ही क्यों?
इतने सारे गुनाह करके भी
बिना डर के घूमे वो आखिर क्यों?
और उसे देख कर
मैं डर डर के सहम के चलूं क्यों?
गलती गुनाह किसी और का तो
फिर यह ताने मुझे क्यों?
गिर के भी कई बार की उठने की कोशिश
लेकिन फिर से मुझे गिराया क्यों?
टूट के भी कई बार की जुड़ने की कोशिश लेकिन
वापस से मुझे ही तोड़ा क्यों?
धोखा खाकर भी किसी पर विश्वास करने की
कोशिश की लेकिन फिर से मुझे ही दगा मिली क्यों?
विश्वास करके सब कुछ सच बताया
फिर भी मुझे ही शक मिला क्यों?
खूब रोयी खूब तड़पी लेकिन
ना मेरे आंसू ना मेरा सच किसी को नजर आया क्यों?
जब धोखा किसी और का गलती किसी और की
तो फिर बदनामी मुझे मिली क्यों?
डर लगता है अब तो किसी पर विश्वास करने से
इस डर के साथ ही मैं कब तक जियू और क्यों?
अगर मेरी शादी करके मेरा घर बसाने का सोचा जाए
तो उसमें भी मेरे अतीत की परछाइयां क्यों?
अगर गुनाह है लड़की होना तो
भगवान ने मुझे बनाया ही क्यों?
क्या है दुनिया में कोई ऐसा जो दे सके इन सवालों के
जवाब कि आखिर यह सब हुआ ही क्यों?
दुनिया में कोई तो हो जो मुझे बताएं की
ऐसा क्या गुनाह था मेरा जिसकी सजा मुझे मिली क्यों?
जब गलती मेरी नहीं थी तो
फिर मुझे सजा मिली क्यों?
Written by- Sakshi jain