गजल
काफिया .इया
रदीफ .कुछ भी ।
वफा का सलीका न दिया ।
दिल को तोड़ दिया कुछ भी ।।
गम में दिल को तड़पाया ।
प्रेम न निभाया कुछ भी ।।
आने का वादा जो किया ।
साथ भी न निभाया कुछ भी ।।
प्रेम में अंखियों को रुलाया ।
दीदार कभी न कराया कुछ भी ।।
ख्वाबों में खुब सजाया ।
हकीकत में प्यार न दिखाया कुछ भी ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि , अमदाबाद ,गुजरात ।