मैं शांत हूँ सागर की भांति,
समा लेती हूं हर पीड़ा स्वयं में,
पर शांति मेरी प्रकृति है,
मत समझना इसे मेरी विवशता,
मत करना इतना उद्वेलित मुझे,
ज्वार-भाटा बन बहा ले जाऊं,
अपने संग तुम्हारा अस्तित्व भी,
तूफान के पश्चात रह जाता है
सिर्फ विनाश और पछतावा
समय रहते न सम्भल पाने का।
#शांत