Hindi Quote in Poem by दिपेश कामडी अनीस

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क्रूर, कुलक्षिनी, कपटी, कामी, कलही, कुमति, कुलकलंकिनी।
कुलटा, क्रोधी, कर्कशा, क़ातिल, कुटिल, कुमाता, कुकर्मी, कुसंगिनी।
क्या क्या कहूँ तेरे लिए? हर विशेषण कमतर लगता है।
अपनी जंघा से मांस खिलानेवाले पति को कह अत्याचारी
घूमिनी-सी लूले लंगड़े को पति कहनेवाली व्यभिचारी।
रानी पिंगला सी पति प्रेम प्रदत्त अमृतफल गैर को दे आई।
हाँ हाँ तूने की प्राणाधिक चाहनेवाले भर्तुहरि से बेवफाई।
घर की दहलीज, लक्ष्मण रेखा के भीतर रावण को लायी।
सूर्पणखा बन अपने ही हाथों तूने अपनी नाक कटवायी
कामांध हो तूँ परपुरुष के साथ सुख से सारी रात सोई।
अहल्या सी तूँ जीते जी जड़ पथ्थर क्यूँ नहीं बन गई?
हाय हाय कैसी क्रुरं और कठोर हो, अंगजा को भूल गई?
कवि 'अनीस' कह रहा कलियुग की आँखों देखी सच्चाई।

@दीपेश कामडी 'अनीस'
05/06/2020

Hindi Poem by दिपेश कामडी अनीस : 111462519
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