दिल की
दिमाग से
रोज़ ही होती थीं लड़ाइयां
तंग आकर एक दिन
दिमाग ने
दिल से
कर लिया
एक शांतिपूर्ण समझौता
कि अब नहीं लड़ेंगे उलझेंगे
हम आपस में
फ़िर ये
दिलो-दिमाग
रहने लगे शांत, चुपचाप
गांधी जी के तीन बंदरों
की तरह ही
अपने मुंह, आंख और कान
बंद कर लिए
पर यूं ही रहते हुए
दिल बैचेन सा रहने लगा
वो सब अपने मन की करता
और बहुत बार टूटता दिल
पर उसे समझाने को
कुछ भी नहीं बोलता दिमाग
और उधर दिमाग का भी
कुछ ऐसा ही हाल था
हर काम वो बहुत
सोच समझ कर करता
पर उसे ज़रा भी
रस नहीं मिलता
रास नहीं आता कोई काम
इस तरह दिमाग से
रहा नहीं गया बहुत दिन
और एक दिन वो जज्बाती होकर
झुका दिल की ओर
और गले लगा - दिल भर रोया
तब से आज तक
दोनों हिल मिल कर रहते हैं
समझते हैं, समझाते हैं
साथ खेलते हैं, लड़ते हैं
बहस करते हैं, सुलह करते हैं
हंसते हैं, रोते हैं
पर हमेशा साथ होते हैं
:- भुवन पांडे
#शांतिपूर्ण