हर गली कूचे गाँव शहर घूम के देखा
मकान कमरा बिस्तर सब बदल के देखा
सुकून फिर भी कहीं देखने को न मिला
दर दर भटक कर थक चुके थे
किस्मत से माँ अभी जिन्दा थी
पास जाकर उसकी गोद में जा गिरे
एक बार फिर वो सुकून जो मिला
वो पुरसुकून सिर्फ बचपन में था मिला
= पुरसुकून
#Peaceful