मैं बहुत सभ्य बना रहता हूं
बड़ा प्रयास करता हूं
अदब से परोसने के लिए
खुद को -
सभाओं में, दोस्तों के बीच
अपने घर में, दफ़्तर में
अपने रिश्तों में, परिचितों में
पर सारी सभ्यता
काफूर हो जाती है
जब मेरा ये 'मैं '
टकराता है किसी से
और टूट जाता है
मिट्टी का कच्चा घड़ा
और छलक जाती हैं बाहर
सारी भरी कड़वाहटें
:- भुवन पांडे
#सभ्य