किस तरह ख़ालीपन भरते हैं...
हम अक्सर सूरत को तेरी, ग़ैरों में ढूंढा करते हैं,
बेवजह लोगों से अक्सर, तेरी बातें छेड़ा करते हैं।
शबे हिज़्र में, तन्हाई में,बस तुमको सोंचा करते हैं,
तेरे नाम की तस्बीह पढ़के, अपना सूनापन भरते हैं।।
बतलाऊँ भी तो बतलाऊँ कैसे,
कैसे- कैसे ज़तन करते हैं।
किस तरह अपना ख़ालीपन भरते हैं।।
किस तरह अपना ख़ालीपन भरते हैं।।