क्यो ....
रूठते हो ...
और रूठते हो ...
तो फिर टूटते क्यो हो
ख्वाबो के सैलाब का तटरक्षक बनने की चिंता ...
या फिर आगे बढने की होर मे जिद्द ....
जमाने मे ब्रांड बनने का ढोंग ..
या फिर कालाबाजारी के बिखरने का दुख:
सबल बनने का लोभ ...
या फिर मूलभूत महल ढ़हने मे गुम ...
# आओ टूटते है ...
अपरिपक्वता की बेरियाँ को तोरने मे 🤔