हाँ ,प्यार नहीं है, तुमसे,
फिर क्यूँ इंतजार करती हूँ,
हाँ, प्यार नहीं है, तुमसे,
फिर क्यूँ तुमसे शिकवे यार करती हूँ???
हाँ, प्यार नहीं है तुमसे,
फिर क्यूँ तेरे चेहरे पर,
नज़रों से अधिकार करती हूँ???
हाँ, प्यार नहीं है तुमसे,
फिर क्यूँ तेरी आँखों में,
अक्स मेरा खोजने,
बेकरार रहती हूँ????
हाँ, प्यार नहीं है तुमसे,
तेरे बिन जीवन जीने की कल्पना से,
क्यूँ यार मैं, डरती हूँ,
हाँ, प्यार नहीं है तुमसे,
क्यूँ तेरे चेहरे की मुस्कान पर,
न्योछावर प्राण करती हूँ????
हाँ, प्यार नहीं है तुमसे,
बस तुम मुझे देखो,
जाने कितने जतन यार करती हूँ,
हाँ, प्यार नहीं है तुमसे,
बस तेरे लिए श्रृंगार करती हूँ.....
हाँ, प्यार नहीं है तुमसे,
फिर भी तुम पर जां निसार करती हूँ,
हाँ, प्यार नहीं है तुमसे
तेरी बाहों में ही,
आखिरी सांस हो मेरी,
ऐसी इल्तिजा हर बार करतीं हूँ.....!!!!!
📝📝नेहा चौधरी की क़लम से✍✍