परिंदों की उड़ान भरनेवालो ,तुम परिंदों के ही घर लूटते हो ।
मत कहो खुद को शान ए इंसानियत ,तुम बच्चों के दाने चुंगते हों ।
ये ढोंग का दस्तूर बस भी करो मियाँ ,तुम कोरोना से भी तेज फ़ांसते हो ।
आईना हो तो देखलो खुद को आईने में ,तुम आंखों क्या ! ह्रदय को भी चूभते हो ।
"ह्रदय"