तू वो है जिसे मे कुछ जाताना तो नहीं चाहती
पर तू क्या है मेरे लिये ये बताना चाहती हु..
तू वो है चाहे जिस्म से दुरी हो पर
दिल के हरदम पास रेहना चाहती हु..
तू वो है जिसके सामने अपने सारे राज खोल देना चाहती हु
तू वो है जिसे गले लगकर मे खुदको खो देना चाहती हु
तू वो है जो मेरी सुबह शाम की हर दुआ मे शामिल रेहता है
तू वो है जो मेरी कलम के हर अल्फाज़ मे शामिल रेहता है
तू वो है जिसकी याद आते ही होठों पर हसीं छा जाती है
तू वो है जो मेरा नहीं है ये खयाल से ही आँख भीग जाती है
तू वो है जिसकी हर छोटी बात पे खुलकर हसना चाहती हु
तू वो है जिससे अपना हर दर्द बयां करके रोना चाहती हु
तू वो है जिसकी गोदमें सर रखकर सुकुनसे सोना चाहती हु
तू वो है जिसकी बाहो मे सोकर पूरी रात जगना चाहती हु
तू वो है जिसके बिना ना सुबह है जलती ना शाम है ढलती
तू वो है जिसके ख्वाब देखे बिना एक भी रात नहीं जाती