"बढ़ना भी जरूरी है
मंजिल का पता चलता है
रुक जाते है जो मुसाफिर
उनकी ओकात का पता चलता है
कर जाते है जो वो सब
भूख प्यास से भी हटकर
बातो का जमाना ना रहा
रह जाती है बाते जमाने के बीच फसकर
कर दिखा तू भी कुछ
दुनिया को बड़ा बनकर
सुन लेते जो जमाने की बात
नही लड़ सकते मंजिल से डटकर "