जब किसी का दर्द अपनाने का मन हो
किसीके होठों की एक मुस्कान के लिए
इन्तहा तक गुज़र जाने का जूनून हो
तो समझलो तुम प्यार में हो ||
कोई नहीं हो आने का और तुम्हे इंतजार हो,
ख्याल आये इन नज़रों को सिर्फ उन्हीका दीदार हो,
तो समझलो तुम प्यार में हो |||
चोट उन्हें लगे और दर्द में तुम हो,
रोज़ा वोह रखे और आज़ान तुम्हे पढ़ने का मन हो,
ख्वाब वोह देखे और उसे मुकम्मल की ख्वाइश तुम्हे हो,
तो समझलो तुम प्यार में हो ||||
टूटे वोह और तुम बिखर जाओ
बाहार सन्नाटा और अन्दर सोर हो
तो समझलो तुम प्यार में हो |||||