कुछ हासिल करने की,
ख्वाहिश़ थी तुम्हारी,
ऐसे ही न करते तुम,
वरना हमसे बेरूखी....
तुम्हें पाना था हसरतों का,
अथाह सागर,
ठुकरा दी इसीलिए मेरी,
प्रेम की भरी गागर.....
तुम्हारी दौलत, तुम्हारी शौहरत,
तुम्हारे लिए बन गई जन्नत....
मेरे लिए साथ तुम्हारा,
था... सबसे बड़ी नेमत.....
रोशनी की चंद लकीरें,
लिख गई तेरी, तकदीरें,
तुम्हें मेरे प्यार की कसम,
मिटा दो हाथों से मेरे,
तुम्हारे नाम की लकीरें.....
बेवफ़ा तुम नहीं,
जानती हूं मैं,
क्या कहूं तुम्हें बुरा????
कीमत तुम से प्यार करने की,
चुकाती हूं..... मैं...!!!!!
📝📝नेहा चौधरी की कलम से✍️✍️