क्या रख्खा है जगडो मे यारो कीसीने गलती की भी तो उसे सुधार के हम महोबत की अच्छाईकी मीसाल नही खडी कर सक्ते, महोबतो मे ही जींदगी का आनंद है , गलती कीससे नही होती, और जरुरी नही गलती कीसकी है , गलती को सुधारके रीश्ते बनाना बडी बात है, ये जरुरी है रीश्ते बनानेकी शरुआत कीसने की ,महोबत की मीसाल बनो , जीयो और जीने दो।।
Raajhemant