प्यार, इश्क़, मोहब्बत
प्यार वोह हसीन एहसास जो इत्र के भांति
खुसबू फैलाता रहता मन उपबन में
दीदार से जिसके सुनहरा लगे सब जीबन में ||
इश्क़ नशा हे, खुमारी हे
सोने नहीं देता, होश में आने नहीं देता |||
मोहब्बत वोह नायाब तोहफा जो मिलजाए
तो दुनिया खूबसूरत लगने लगती हे,
दिल थक कर सो भी जाये,
पर आँखें जगती रहती हे |||
प्यार, इश्क़, मोहब्बत
सत्य शिव सुन्दर का स्वरुप कहलाता हे
जीबन जीने का आधार बनजाता हे ||||