संस्कार
कहां खो गया संस्कार ?
आज पूछ रहा संसार
जब बिबेकानन्द, भगत सिंह आदर्श ना रहे
तो समझलेना खतरे में हे संस्कार ||
गुरु अपनी मर्यादा लांघे, ब्यभिचार पे उतर आये
रिश्तों से पबित्रता कंही खोजये, माता पिता के
कथन संतान के लिए निरर्थक हो जाये तो समझ लेना
मौत से जूझ रहा हे संस्कार |||
जब द्रौपदीयोँ का चिर हरण हो,
और लोग धृतराष्ट्र बन मौन रहे,
जब चरित्र की कीमत कम
और नग्नता का मॉल बढ़जाये
तो समझलेना अपाहिज हो गया हे संस्कार
इस बनाबटी दुनिआ के भीड़ में खो गया हे संस्कार |||
संस्कार बिहीन इनसान
ज़िंदा लाश बन रह गया हे ||||