मित्र युगल आ बैठे घर पर, मतांतर सुलझाने को
एक कर्म का साधक था ,तो दूजा भाग्य जगाने को
एक दुहाई कर्म का देता, दूजा इसे झूठ बताने को
होगा वही को लिखा भाग्य में, दिया प्रमाण जमाने को
नाहक ही परेशान होते क्यों, अपने को इतना सताते क्यों
तकदीर लिखे ऊपरवाला, फिर कर्तव्य का पाठ पढ़ाते क्यों
सुनकर दूजा ये मुसकाया, मित्र को अपने समझाया
संघर्ष का नाम ही जीवन है, यह सूत्र सभी ने बतलाया
कर्महीन नर बाट जोहते, भाग्य की आस में रहते हैं
वर्तमान बनाता भाग्य हमारा, किस्मत मुट्ठी में रखते हैं
कर्म,सोच,व्यवहार हमारे, भाग्य नींव के कारक हैं जीवन रूपी भवसागर के, यही तत्व तो तारक हैं
ऊपर वाला वही लिखे भाग्य , हर इंसान के खाते में
जिसकी जैसी करनी होगी, परिणाम लिखाए खाते में
#भाग्य