पागल थे हम जो इतना टूटकर चाहा तुझे.....
तुम्हे हमें देखके मुस्कुराने की अदा को हम प्यार समझ बैठे, वरना तुमने तो जाते जाते मुड़कर भी नहीं देखा था मुझे...
पागल थे हम जो तुम्हे जाता देख, चुपके से आके रास्ते से जाका था तुझे...
वापस मुड़कर देखते तो पता चलता, तुम्हारे जाने का दर्द कितना हुआ था मुझे...
पागल थे हम जो तुम्हे दिल मे बसाया ओर हर बार दिल से ही सोचा था मेने..
पर तुम तो दिमाग़ वाले निकले, दिल की जगह पथ्थर जो रखा था तुमने...
पागल थे हम की तेरे प्यार मे खुदको पागल बना लिया...
ओर देखो तुमने तो कैद करके मुझे अपनी यादो मे खुदको आज़ाद बना दिया...
पागल थे हम की ये सोचते रहे की हमारे ज़ख्मो की दवा तुम बनोगे..
पर तुम तो ज़ख्मो पर मरहम लगाने भी नहीं आये, पता नहीं था की मेरे ज़ख्मो की वजह भी तुम ही बनोगे...
पागल थे हम जो तुम्हारा प्यार पाने के लिए तुम्हारे सामने रोये... गिड़गिड़ाए...
पर ऐसे तो तमाशा बन गया हमारा ओर हमारे प्यार का, इससे तो अच्छा है अंदर ही अंदर रोये ओर सबके सामने मुस्कुराये...