बताना है तुम्हें इश्क़ अब भी है तुमसे,
पर यूं ही तन्हा से रहना सीख गई हूं मैं..
तलब आज भी होती है तुमसे बात करने की..
पर उस तलब को दफन करना सीख गई हूं मैं,
आज भी तुम्हारी परवाह होती है मगर..
बेपरवाह रहना सिख गयी हूं मैं..
दिल तो बहुत दुखता है याद में तुम्हारी..
पर उस दर्द को छुपाना सीख गयी हूं मैं..
#सीखना