कभी कभी ऐसा भी होता हैं
कलम हाथो से भारी हो जाती है
किरदार अपनों सा प्यारा हो जाता है
पानी की बूंद को सागर से गहरा लिख देते है
तो कभी सागर की गहराई एक बूंद में समझा देते है
कभी कभी ऐसा भी होता है
शब्दों के अर्थ भुल जाते है
कहानी को आगे ना बड़ा पाते है
एक किरदार दूसरे से ना जोड़ पाते है
तो कभी किरदार खुद पे हावी हो जाता है
कभी कभी ऐसा भी होता है
दिल से लिखी कविताएं दिल ना छू पाती है
ऐसे ही लिखी पंक्तियां दिल में समा जाती है
कभी सोचते है ये सब छोड़ दे
तो कभी बस लिखते जाते है
लेखक की जिंदगी में
कभी कभी ये सब भी होता है