सब कुछ छीन लिया,
जान अब भी बाकी है,
साँसों के तार मे,
तेरा नाम, अब भी बाकी है...
लुट सको तो लुट लो,
महक ये तुम्हारी,
जिस्म का फना होना,
अब भी बाकी है....
सपनों के अंगारे,
जला रहे हैं आँखो को,
इन आँखो का समंदर छलकना,
अब भी बाकी है....
शिकायत नही है,
शिकवा नहीं,
कोई इल्जाम नही,
औकात मुझे मेरी दिखाना,
अब भी बाकी है....
तुम्हें जाना है,
चले जाओ,
बस,
लौटा देना दिल मेरा,
क्यूँकी.....
दिल से दिल का,
हिसाब अब भी बाकी है....!!!!
📝📝नेहा चौधरी की कलम से✍️✍️