खुशियाँ मुखर
दर्द हुए गूंगे
आंखे नम
होठ मुस्कुराएं
ऐ जिंदगी
पहेली सी
क्यों हो तुम
समझ न आये
हर खुशी में
एक आह है
हर गम में
एक वाह है
तेरा जलवा है
या कोई बला है
हर सूरत में
तू लाजवाब है
दहकते मरु में
उस्वा की आस है
मेरा कान्हा ही
बस तेरा इलाज है
कलयुग है कान्हा
अब आ भी जाओ
इस राधा को
तुम्हारा इंतजार है।
विनय....दिल से बस यूं ही