चल पड़ा था सूरमा घर बार छोड़ कर
जैसे ही फ़ौज से मिली थी उसे ख़बर
रोते रह गए माता पिता और भाई बहन
और उसकी ब्याहता नयी नवेली दुल्हन
अभी आने वाली थी उसकी पहली होली
दो दिन बाद चला रहा था अंधाधुन गोली
बदन हो चुका था उसका लहू लुहान
उसे फ़िक्र कहाँ थी अपने तन की
न चिंता थी बीबी के मांग के सिन्दूर की
न उसकी सुरमई आँखों से बहते आंसू की
कसम खायी थी दुश्मन की जान लेने की
सूरमा को रखना था वतन का मान
दुश्मन को मार आया उसकी जान में जान
और हवा में लहरा रहा था तिरंगा महान
= सूरमा
#Knight