"ऊब चुकी हूं मायूसी से बैठी अंधकार कोने में ,
अब तक सोचे बैठी थी मैं ,सूरज बदले दिशा किरण की,
खोजे मुझको मुझतक पहुंचे ,बदले निशा मेरे जीवन की,अब मैं समझ चुकी हूं लेकिन, सूरज का तो काम चमकना,
अंधकार का पीछा करना ,ठहरा एक जगह पर लेकिन, 'शूरवीर' सा और बली बन कमियां खुद मुझमें ही थी|
अंधकार को ओढ़े थी, बैठी थी एक कोने में ,ये न जाना, और पहचाना, बिना परिश्रम कुछ न मिलता,
सूरज की किरणों को पाने , धरती को ही चलना पड़ता|"
#शूरवीर