ये खुदा,
अब आग कि बारिश कर,
न्याय के खातिर अंगारो के बरसा ओले,
दुनिया को खत्म करने, बोल प्रलय को अब शुरू हो ले।
ये तेरा ही बनाया गया था इंसान,
जो अपने लालच से बनता जा रहा एक हैवान।
कहीं जीवित बच्चो से ही गुर्दे है निकाले जा रहे,
कहीं बहू घर से अपने बुजुर्गों को है निकलवा रही,
तो कहीं देहज के लिए ससुराल वाले,
अपनी बेटी जैसी बहू को जिंदा है जला रहे।
ज्वालामुखी का भर के ले आ सैलाब,
देख जरा धरती पे आके,
कैसे तेरे नन्हे फरिश्तों को आपंग बना के,
भीख है मंगवा रहे,
जानवर बन के जिस्म खा के,
जिंदा लडकियो को जलाया है जा रहा,
हैरान हूं तेरी चुप्पी देख के,
कि केसे अभी तक तू चुप बैठा रहा।
कीचड़ ही कीचड़ है बेईमान का,
यहां वहां है फेला हुआ,
हे मेरे मालिक अब यम से इसको अच्छे से साफ दे करा।
सुन बात मेरी जैसे खुदा भी बोल रहा,
देख चुका हूं हालत दुनिया की नहीं हूं में इस से अनजान,
देख जरा अब दुनिया को प्रलय का पहला चरण,
अब कब का शुरू हो है चुका।
दुनिया में फैली ये गंदगी को,
इंसानों से ही साफ रहा हूं करा।
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