बचपन के कुछ किस्से ऐसे थे
दोस्तो संग गिल्ली डंडा खेला करते थे
पेड़ पे जुले जुलते थे
बड़े नवाब से हैं हम जीते थे
बचपन के कुछ किस्से ऐसे थे
मां की लोरिया भी सुनते थे
और पापा की डांट भी खाते थे
बड़ो से आशीर्वाद भी पाते थे
बचपन के कुछ किस्से ऐसे थे
अभी के क्या किस्से सुनाऊं दोस्तो
आज का मानव तो डिजिटल ही बड़ा हो रहा है
जो उंगलियां कभी गोटिया खेलती थी
आज वो मोबाइल की स्क्रीन पर चलती है
बचपन के वो कहानी वाले दिन ही अच्छे थे
कुछ भी बोलो लेकिन बचपन के वो किस्से अच्छे थे,......