बहुत कुछ बताना चाहती है
पर कुछ कह नही पाती है
हैं छुपाए कितने दर्द दिल मे
न जाने क्यों बता नही पाती है
प्यार तो है बहुत उसके मन मे
पर फिर भी जता नही पाती है
अरे कोई तो बता दो जाकर
हम भी समझते है उसके जज्बातों को
सुनना चाहते हैं उसके सब हालातों को
खुद तड़पती है और मुझे हँसाती है
पूछा कितना कई बार राज ए ग़म का
पर न जाने क्यों कहने से घबराती है
- Alok Sharma