#પાગલ
ख़ुश्बू हवा में बिखर बिखर
क्या ढूँढे #पागल इधर उधर
जिधर भी देखूँ मैं तो आए
उसका ही चेहरा नज़र नज़र
आँखों से बस प्यार ही बरसे
भीगी मैं जाऊँ निखर निखर
अब जाने कब वो आन मिलें
बावरी डोलूँ बन सँवर सँवर
कुछ मन में ऐसी लगी लगन
जाए चलता राही डगर डगर
सुना है उनके बड़े हैं चर्चे
गाँव गाँव और नगर नगर
करनी है तो हाँ ही कर दो
अब नहीं चलेगा अगर मगर
बहुत हुआ ये खेल तमाशा
तुम बिन ना है गुज़र बसर
मुझको खुद में मिट जाने दो
बहती जाऊँगी ठहर ठहर...l