सांसे हो, धड़कन हो, या चाहे सुकून~ए~पल हो, झिन्दगी के हर पन्ने पर में नही,अब बस तू ही तू हे, ख्वाहिश~ए~इश्क़ मे, ख्वाब~ए~नींद मे, में नही अब बस तू ही तू हे, जब भी पूछते हे लोग मुजसे मेरा परिचय, केसे समजाऊ उन्हे, की मुज मे, में नही अब बस तू ही तू हे।
#परिचय