परिचय
अपनेपन से लबरेज
सह अस्तित्व का हितैेषी
नहीं चाहता
नाम के आगे या पीछे
श्री लगाना
स्वयं ही हो जाता है
उसका परिचय
तमाम अपरिचितों के बीच
बन जाना चाहता है सदैव
दूसरों का सहारा
बिना मांगे ही करता सहयोग
अनंत इच्छाओं के पार
प्रतिदिन की समस्याओं से
करता आंखें चार
आर या पार
पर छोड़ता नहीं मझधार
यही उसका परिचय
तमाम अपरिचितों के बीच
परिचित हो जाना भी
अहंकार न कर दे
सत्य की पगडंडी पर चलते हुए
छद्म सत्य से लिपट न जाए
निपट अकेला ही चलता वो
शायद उसका वही परिचय है
सत्य के साथ विजय है
तमाम अपरिचितों के बीच
-शिव सागर शाह "घायल"
#परिचय