Hindi Quote in Thought by Roopanjali singh parmar

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ये एक दिन की बात नहीं है।
इसकी शुरुआत तब हुई थी जब तुमने पूछा था..
"कैसे हो"??
और उसने मुस्कुराकर कहा था "ठीक हूँ"..
और सुनो..
ये "ठीक हूँ" महज़ एक उत्तर था।

तुम्हें वक़्त नहीं था या शायद ज़रूरत ही नहीं थी आगे कुछ जानने की..।
वो बताने में झिझक गया और तुम सुनने में दिलचस्पी नहीं दिखा पाए।
फिर जब तुमने कहीं कुछ आधा-अधूरा सुना..
तो उससे कहा "खुश रहा करो"।

ये समझदारी से तुमने कह तो दिया, मगर क्या तुम्हें लगता है..
की वो खुश नहीं होना चाहता..
अरे! खुश कौन नहीं होना चाहता..

आँसुओं के लिए शरीर में कोई बटन नहीं होता,
जिसे दबाते ही आँसू थम जाएं।
दुःखी होने की चाहत किसी की नहीं होती।

तो समझदार क्यों बनना..
क्या यही समझदारी, तुम्हारे दुःखों में तुम्हें रहती है।

मुझे लगता है ज़्यादा समझदार भी नहीं होना चाहिए।
इतना तो कभी नहीं कि दिखावे में खुद ही घुटना पड़े।

और हाँ.. मैं बताना भूल गई थी..
मैं समझदार नहीं हूँ,
और चाहती हूँ कि सभी समझदार, मुझे नादान (बेवकूफ़) बने रहने दें।

कम से कम मैं खुद ही खुद को छलती नहीं हूँ।।

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Hindi Thought by Roopanjali singh parmar : 111430627
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