#श्रुत
यह बारिश जब आती है
सौंधी सौंधी महक मिट्टीकी
मन को भा जाती है |
चाय की चुस्की के साथ,
गिरती बूंदों को निहारने में,
कितना मज़ा आताहे सावन के महीने में ||
ये रिम झिम बूंदे मन को भिगोये जाती है,
मस्त मगन होकर मोर भी चहकती है,
जैसे दूर कहीं मेघ मल्हार कोई गाता है
ये बारिश तो प्रियतम की याद दिलाती है |||
यह सिर्फ बरसात नहीं अनकही जज्वात हैँ,
प्यासी धरती की प्यास बुझाने
अति हैँ बारिश हमें भीगोने ||||