देखिए विध्वंस का तांडव मृत्यु की अनुगूँज से वातावरण सिहरा हुआ है ।
यह नहीं कोई कोरोना जान लें ईश्वर भी अब आप पर बिफरा हुआ है ।
कर्म यदि कलुषित किया तो मृत्यु से भयभीत क्यों हो ।
परिणाम भी तो सत्य है प्रिय सत्य से भयभीत क्यों हो ।
उठो वीरों सत्य का अनुश्रवण कर आगे बढ़ो ।
धीरता से विश्व के कल्याण हित चलते चलो ।
धर्म धारण यदि करोगे प्रकृति के संग संग चलोगे ।
तुम स्वयं इस विश्व को काल से संरक्षित करोगे ।।
हिंसा कपट विद्वेष छल से दूर होना ही पड़ेगा ।
अन्यथा जीवन तुम्हारा क्षीण होकर नष्ट होगा ।।