हा याद हे मुझे कहाँ था
में सबकुच बया करूँगा
अभी वक़्त सही नही
बातें केह्ने को
आयना दिखा रहा हे
वो राहे जहां कही थी सभी बातें हंसते हंसते
पर अब क्या करूँ आएने क़ो मेरी सूरत पसंद नही हे
मुस्कुरायेगा वो परिंदा ऐक दिन फिरसे
आसमाँ में उड़तेउड़ते
जब बुलाएँगी बरखा उसे क़भी अपने हाथों से
हा याद हे मुझे
जेनिश