महोबत करने की ,अंदाज़ बेमिशाल है
हुश्न हकीकी, तेरा होना बेमिशाल है
पाया भी क्या खोकर खुद को जिंदगी
खोया जो उनका , पाया बेमिशाल है
बहुत सब्र से ,काटी है बिरहाना जिंदगी
मौज़ ए मिलन मुस्कराहट बेमिशाल है
आदत है जीने की , जीस्म जाँ में दुनिया
रुहानियत मे रुह का होना बेमिशाल है
गज़ब है , सुकुन ओर शोहरत ए ईनाम
नाम तेरा , ईबादत ए हुश्न बेमिशाल है