चेहरा से ही पहचान बनती है,दर्पण में ही यही प्रतिबिम्बित होती है।
चेहरे भी बहु रुपिये होते हैं, एक में अनेक छिपे होते हैं।
दिल के भाव चेहरे पर आते हैं,तभी तो दो दिल मिल पाते हैं।
चेहरा दर्पण में देख सकते हो,पाप पुण्य का जीवन में अन्दाज लगा सकते हो।
प्रातः उठकर चेहरा किसी अच्छे का देखा करो।
अच्छा खोजने से भला ईश्वर में मन लगाया करो।