सब है हम ही में:
हिरण्यकश्यप का अहंकार भी,
होलिका की चालाकी भी,
और प्रह्लाद की निर्दोषता, निर्मलता भी।
हम अपने प्रह्लाद को जाग्रत करें, और हिरण्यकश्यप व होलिका को ज़रा दूर करें स्वयं से।
बाहर के रंगों के साथ-साथ भीतर वो भी याद रहे जिसका कोई रंग नहीं।