English Quote in Poem by Ekta. R

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            स्वर्ग


धधकते सुलगते कुटुंब, क्रंदन करते स्वर

नभ भी नि:शब्द, वसुंधरा भी अनुच्चरित

कुछ अवशेष भी है तो वह है विनष्ट दृश्य

सर्वदा परितुष्ट रहने वाला अंत:करण आज कर रहा है प्रवसन।


अनैतिकता का साम्राज्य है छाया, उजड़ रही है सरमाया

घाटियाँ आज भी वहाँ ही स्थाई है, लेकिन हां यथेष्ट रूप से वर्णशून्य भी है।

यत्र तत्र आशंकाओं का है डेरा, हर्ष-शांति सब लूट रही

घोर संघर्ष के कारण मूक आत्माएँ भी खूनी आखेट के लिए बिक रही।


आतंक के इंद्रजाल ने अंतरात्मा को ऐसा घेरा

आगमन को यदि मानस चाहे तो भी मात्र गहन अंधेरा

भगवान के दरबार में अधर्मी कभी नहीं टिकते

अटल आकांक्षाओं के दीपक कभी नहीं बुझते।


युग बदला, दशा बदली और आया एक ऐतिहासिक काल

दो सदाशयी देशभक्तों ने समझा विध्वस्त स्वर्ग का सत्य हाल

मोदी-शाह के राष्ट्रप्रेम ने कर दिया धारा 370 का अंत

हर एक युग में पुनर्जात होते हैं समाज सुधारक, कह गए पुराने संत

स्वतंत्र स्वर्ग की निखरेगी अब अप्रीतम आभा

अदम्य निर्भीक इस निर्णय की दुनिया सदा गाएगी गाथा।


- एकता रंगा

#Kavyotsav2 #Kavyotsav2

English Poem by Ekta. R : 111422125
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