मन ऊब गया है. वही शोर, वही आवाज़ें. शिकायत नहीं है. अजीब सा एहसास है मन में, अजीब. जिस रोज नया दिन निकलता है. मैं वही पुराना हूँ . दुनिया वही पुरानी है. वैसे ही चली जा रही है. मुझे लगा जो ये ज़िंदगी की गाड़ी चल रही है. इसकी चेन मैं खींचता हूँ और उतर जाता हूँ .
-इरफ़ान ख़ान, रोग
RIP🙏🙏