तन्हाई कोई शब्द नही, गर शब्द होती तो मिटा देता और सज़ा भी नहीं है, गर सज़ा होती तो शब्र करके ख़ुशी ख़ुशी काट लेता, तो ये है क्या?
क्या ये समय तो नहीं? या फिर ज़िन्दगी.. या फिर सच, सच की तन्हाई शब्द ही अपने आप में एक मुकम्मल कहानी है और यही परम सत्य है|