आनंद से भरे हुए वो दिन..
कभी तकिये को लेकर ,
हवा में उछाल
कभी फिर से पैरो तले मै दबाऊ
कभी जब मै रोऊ,
तो कभी चिल्ला के गाऊ।
कभी सीधी सड़क में दौड़ती ही जाऊ
जब मुड़कर देखू तो वापस में आऊ
वो सावन के झुलो को कैसे विसारू
आनंद भरे दिन कहा से फिर लाऊ।।
#आनंद