आनंद
जब राम लला घर आये हैं,तब आनंद दिल में छाया है।
चहुँ चौके चारू पुराई हैं और बन्धन वार बँधाया हे।
वह घड़ी धन्य वह मनुज धन्य,जिनने यह संदेश सुनाया है।
फिर अवधपुरी में जन्मभूमि पर,रघुवर को पधराया है।
भारत की भूमि है तपोभूमि,यह रही सदा वीरत्व भूमि।
वीरों ने तन न्योछावर कर,आनन्द दिवस फिर लाया है।कलियाँ मुकुलित भँवरे गुँँजित,रवि भी प्रमुदितहो आया है।
चहुँ ओर सभी आनंद भरे, आनंदित पर्व मनाया है।