#नियति
नियति ने रचा बराबर हिसाब का खेल
थम गयी है जीवन की रेल
पहले कैद किये गए जानवर
अब इंसान घर में कैद है
पहले हम खा रहे थे जानवर
अब ये वायरस हमें खा रहा है
जैसी करनी वैसी भरनी
स्पष्ट दिखाई दे रही है
अभी भी है वक़्त
करलो नियम सख्त
करेगे प्रकृति की रक्षा
तभी चलेगी सुख की रिक्शा
Yakshita Jain
Research scholar, History