अक्किसवी सदी की चकाचौध भरी आधुनिकता आदिमानव के अत्याधुनिक रूप होमो सेपियंस की असाधारण जीवन शैली आसान और सरल बनाती है। और इसे और सहज बनाने के लिए ये दो कौड़ी का इंसान अपनी आकांक्षाओं को और आगे और उससे भी आगे बड़ा रहा था, लेकिन शायद कुदरत ने इस मनाव को उसकी औकात दिखा दी।
सुबह , रात और फिर सुबह होते ही जैसे दुनिया ही बदल गई। मानव के आधुनिक शहर रुक गए, शहरों के शहर सुनसान हो गए, पूरी दुनिया घरों में कैद हो गई लेकिन ये रुकी हुई दुनिया सिर्फ और सिर्फ ये गैरजिम्मेदार मानवों की है और इसकी वजह से कुदरत की खूबसूरती फिरसे निखरने लगी है। कश्मीर में ऊंचे पहाड़ तीस,तीस साल बाद फिरसे दिखाई दे रहे है, दिल्ली का प्रदूषण कम हो गया है जो शायद असाधारण जीवन शैली रुक ती नहीं तो संभव नहीं था। कुदरत और ज्यादा खूबसूरत हो रही है। कुदरत आधुनिक मानव को संदेश दे रही है कि कुदरत के आगे तुम्हारा आधुनिक विश्व , विकसित देश, विज्ञान और उसकी टेक्नोलॉजी, डॉक्टरों का ज्ञान और उनकी दवाइयां, धन दौलत, कुछ भी काम नहीं आयेगा और सिर्फ कुदरत का कहर बरसे गा। अगर ये सब दौबारा देखने की चाहत ना हो तो मेरी दुनिया में फिरसे प्रवेश करने से पहले ये याद कर लेना की ये कुदरत कि बेशकीमती पृथ्वी पे मानव सिर्फ मेहमान है मालिक नहीं, और अगर फिरभी भी अपनी जीवन शैली और आधुनिकता में बदलाव नहीं किया तो शायद एक और कम समय में कुदरत कहर बनके बरसेगी, इंसानों के शबो को दफना ने के लिए जमीन कम पड़ जाएगी, उस बार कोरोना नहीं तो कोई और आफत आयेगी।