उलफत की देखीए कैसी ईम्तिहान हो गई
शबे गम़ बिरहाना दिल, अजिब सी छा गई
हाद्सा कैसा हुआ, जिस्म ओर जाँन काे
आँखो में नमी देखीए, अजिब़ सी छा गई
घाव फिक्र कहाँ , कदम चलते राहे वफा से
मरहमी याँदे मुस्कराती, अजिब सी छा गई
बिलख़ना क्या, हर्फ भी ना निकले दिल से
मौन में मस्ती रुहानी , अजि़ब सी छा गई
रंजो अलम से परे, रहेमताई का दौर है उनका
रहेमत खुदा का प्यारी, अजिब़ सी छा गई