फूलों की नजाकत में जिया हूं, मै सदा "हमदर्द"
शहद का पैगाम लिए जिया हूं, जहरके साथ;
ओ रहमत ए दिल फरिश्ता, कुछ रियायत कर ,
ईमान और शोहरत से जिया हूं,,कहर के साथ;
लाजिम है जख्मों का यहां पर होना, ओ हमदर्द"
मैं दर्द बनकर बेखबर जिया हूं, बेखबर के साथ;
मरहम ही अंदाज है ,मेरा जीना यहां पर यकीनन,
मैं मुस्कुराते हुए जिंदगी जिया हूं,महोबत के साथ;