अब हर वो शख्स अब हर वो लम्हा भुला देना चाहते है
जिन्हें हम भुला नहीं पाते, जीना चाहते हैं बिना गम के
पर शायद गम को मेरी आदत सी हो चुकी है Bindu A.
के चले जाना है यहां सब कुछ छोड़कर
फिर क्यों बंधनों की डोरियों में ही जीये जा रही हुं
नहीं मालूम क्या है मेरी किस्मत में
फिर भी बस जिए जा रही हुं.....
बस जीए जा रही हुं......