# curious
जिज्ञासा का अंत कभी न जिज्ञासा न हो संतुष्ट
मानव-मन भर जिज्ञासा से नहीं कभी होता है तुष्ट
सदा डोलता इधर -उधर ढोता साँसों की गठरी
अंत समय तक नहीं समझता सही कौनसी है पटरी
जान सकें यदि हम सब कुछ तो ईश समझ लें अपने को
अहं भाव में मचले मनवा तोड़ें सब संबंधों को
चार दिनों के जीवन में भ्र्ष्ट न कर दें सपने को
जीवन तो एक सपना ही है इसे समझना ही होगा
आँसू पोंछ सकें हम सबके हमें संभलना ही होगा |
आज जहाँ हम खड़े हुए हैं वह क़तार हम सबकी है
सभी स्वस्थ और रहें सुरक्षित यही कामना सबकी है |